GSSY - Guru Siyag's Siddha Yoga
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ऐ वी एस के का स्वरुप

सेवाभावी आध्यात्मिक संस्था

      

      अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र (AVSK) . गुरुदेव इस संस्था के संस्थापक तथा संरक्षक हैं। यह संस्था आध्यात्म विज्ञान की उन्नति, उसके प्रचार प्रसार तथा उसे पुनर्जीवित करने के लिये समर्पित है जिससे मानवता में दिव्य रूपान्तरण लाया जा सके। गुरुदेव सियाग के योग की विधि जो सिद्धयोग कहलाती है, जिससे भयानक बीमारियों जैसे कैन्सर, एच. आई. वी./एड्स से उत्पन्न दुःख दर्द को दूर कर, सम्पूर्ण विश्व में आध्यात्मिक विकास द्वारा, शान्ति एवं भाईचारे की भावना को बढावा देकर, मानवता में दिव्य रूपान्तरण के महान उद्देश्य की प्राप्ति करना है।

      

     

एक अलाभकारी संगठन
AVSK एक अलाभकारी आध्यात्मिक संगठन है इसका अपनी स्वंय की आमदनी का कोई साधन नहीं है और न यह सरकार से अथवा व्यवसायिक घरानों से किसी प्रकार के फन्ड प्राप्त करने की कोशिश करता है इसके समस्त कार्यकलाप गुरू सियाग के शिष्यों द्वारा स्वेच्छापूर्वक नकद या उपकार के रूप में दिये गये योगदान से होते हैं, संस्था के स्वयं सेवक जिस शहर में रह रहे हैं, गुरुदेव से आज्ञा लेकर स्वयं के खर्चे पर ध्यान केन्द्र स्थापित कर सकते हैं।

      

      AVSK ने गुरू सियाग के मिशन के बारे में समाज में जागरूकता बढाने के लिये स्पिरिचुअल साइंस (spiritual science) नामक मासिक पत्रिका भी प्रकाशित की जा रही है।       

अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर - उद्देश्य

      

  •       विश्व के समस्त धर्मों के विकारों एवं आडम्बरों से मानव मात्र को मुक्त करना एवं अध्यात्म के मूलभूत सार्वभौम सिद्धान्त के अनुसार ‘‘मन मन्दिर’’ में उस परमतत्व की प्रत्यक्षानुभूति एवं साक्षात्कार कराना।

      

  •       समस्त विश्व के मानवों के कल्याण हेतु बिना किसी वर्ग, वर्ण, जाति, धर्म, राष्ट्रीयता एवं लिंग भेद के इस दिव्य ‘‘अध्यात्म ज्ञान’’ का प्रचार एवं प्रसार करना एवं समस्त विश्व में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र स्थापित करना।

      

  •       विश्व भर में वैदिक दर्शन की प्रत्यक्षानुभूति एवं साक्षात्कार करवा कर भौतिक जगत् में विज्ञान की तरह सत्य प्रमाणित करना।

      

  •       विश्व कल्याण हेतु सम्पूर्ण विश्व में वैदिक मनोविज्ञान (अध्यात्म विज्ञान) की शिक्षा हेतु प्रबन्ध करना तथा वहीं के लोगों को इस ज्ञान का प्रशिक्षण देने योग्य बनाना।

      

  •       विश्व के सभी सकारात्मक स्त्री-पुरुषों को शक्तिपात दीक्षा देकर चेतन करना तथा उन्हें अपने ही देश में इस ज्ञान के प्रचार-प्रसार का अधिकार देकर मानव शान्ति का पथ प्रशस्त करना।

      

  •       सिद्धयोग में वर्णित ‘‘शक्तिपात दीक्षा’’ द्वारा मानवीय गुणों में परिवर्तन लाया जाकर तमोगुण से रजोगुण, रजोगुण से सतोगुण, सतोगुण से ‘‘त्रिगुणातीत’’जाति में बदलकर उस परमतत्व की प्रत्यक्षानुभूति एवं साक्षात्कार कराना।