GSSY - Guru Siyag's Siddha Yoga

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ठीक हुए मरीज

जी. एस. एस. वाई. से एड्स पूरी तरह ठीक हुआ :

जोधपुर (राजस्थान-भारत) निवासी भंवरलाल जाट एड्स की अन्तिम अवस्था तक पहुँचा हुआ एक ऐसा ही केस था। चिकित्सालय में जब उसका इलाज चल रहा था उसके नजदीकी रिश्तेदारों से डॉक्टरों ने यह कहकर कि भंवरलाल अब मृत्यु के अन्तिम छोर पर पहुँच चुका है, इसे घर ले जाओ, चिकित्सालय से डिस्चार्ज कर दिया था। एक अक्टूबर २००२ के दोपहर बाद स्ट्रेचर पर लादकर ऐसी हालत में भंवरलाल को गुरू सियाग के पास लाया गया । वह न तो बोल सकता था और न अपने हाथ पैर ही हिला सकता था। गुरू सियाग ने भंवरलाल को मंत्र दिया, लोग पूरी तरह से आश्चर्यचकित रह गये जब उन्होंने देखा कि एक सप्ताह के अन्दर ही भंवरलाल के स्वास्थ्य में सुधार के स्पष्ट लक्षण दिखाई पडने लगे। उसका बाद में वजन बढ गया और पूर्ववत पूर्ण स्वस्थ हो गया। तब से वह अपना सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है। एड्स से भंवरलाल का आश्चर्यजनक सुधार व उसके प्रत्यक्ष रूप से स्वस्थ होने के लक्षणों के बावजूद आज स्थानीय चिकित्सा बिरादरी उसके केस को आगे लाने से मना करती है क्योंकि एक बीमारी की आध्यात्मिक चिकित्सा का विचार विकसित पश्चिम के चिकित्सकों के गले अभी तक नहीं उतर सका है।


जी. एस. एस. वाई. से कैंसर पूरी तरह ठीक हुआ :
बीकानेर (राजस्थान) निवासी, श्रीमती सुशीला का ल्यूकीमिया (ब्लड कैंसर) का केस भी इसी प्रकार का था। अप्रैल २००० में उनके सफेद रक्तकणों का स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुँच गया। उनके परिचितों ने उन्हें गुरू सियाग के बारे में बतलाया, अतः उन्होंने अन्तिम विकल्प के रूप में इसे चुना। मई २००० में श्रीमती सुशीला ने गुरू सियाग से दीक्षा ली। गुरुदेव सियाग से दीक्षा लेने के ९ दिन बाद ही श्रीमती सुशीला के आश्चर्यजनक सुधार हुआ। सिद्ध योग का अभ्यास करने के २ माह के अन्दर ही श्रीमती सुशीला के सफेद रक्तकणों की संख्या सामान्य हो गई।


जैसे ही श्री भंवरलाल तथा श्रीमती सुशीला देवी के आश्चर्यजनक रूप से ठीक होने की बात देश में चारों ओर फैली, एड्स/एच. आई. वी. तथा कैन्सर से पीडत मरीज जिन्दा रहने की प्रबल इच्छा लिये दैवीय मदद हेतु गुरू सियाग के आश्रम में पहुँचने लगे। घातक तथा लम्बे समय से चली आ रही बीमारियों से ठीक हुए अनेक लोगों के रिकार्ड को गुरू सियाग ने संकलित करा रखा है