GSSY - Guru Siyag's Siddha Yoga

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बीमारियों का इलाज़

    • गुरु सियाग सिद्ध योग ध्यान विधि से कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होने से साधक को विभिन्न प्रकार की योगिक क्रियाएँ होने से शरीर की सभी प्रकार की बीमारियां ठीक होना आरम्भ हो जाती हैं।
    • ध्यान के दौरान योगिक क्रियाएँ केवल उसी अंग की होती हैं जो बीमार होता है, जैसे किसी के हाथ या गर्दन में दर्द है तो ध्यान के समय हाथ या गर्दन की योगिक क्रिया होती है। कुछ दिनों बाद जब शरीर के उस हिस्से की बीमारी ठीक हो जाती है तो योगिक क्रियाएँ अपने आप रुक जाती हैं।
    • एड्स जैसी बीमारी की स्थति में, जिसमे सारा शरीर प्रभावित होता है, ध्यान के दौरान साधक आंतरिक क्रियाएँ जैसे गर्मी, कम्पन, तरंगे, बिजली जैसा प्रवाह आदि महसूस करता है।
    • गुरु सियाग सिद्ध योग के नियमित ध्यान से शरीर की बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता में बहुत वृद्धि हो जाती है।
    • जागृत कुण्डलिनी शक्ति साधक में विभिन्न प्रकार की बीमारियों के लिए एक रक्षक दीवार की तरह काम करती है जो उस बीमारी को दोबारा आने का मौका नहीं देती।
    • साधक को बीमारी ठीक होने के संकेत नियमित ध्यान एवं जाप से, २ से १५ दिनों में मिलने लगते हैं।
    • गुरु सियाग सिद्ध योग ध्यान विधि से किसी बीमारी, नशा या मानसिक समस्या से ठीक होना, पूर्ण रूप से साधक की ध्यान व जाप करने की नियमितता, समर्पण व लगन पर निर्भर करता है। साधक जितना लगन व समर्पण से ध्यान व जाप करेगा उतनी ही जल्दी उसकी बीमारी ठीक होगी।
    • गुरू सियाग ने अनेक केसैज में यह सिद्ध किया है कि जी.एस.एस.वाई. का नियमित अभ्यास लम्बे समय से चली आ रही बीमारियों जैसे गठिया व डायबिटीज (शक्कर की बीमारी) तथा अन्य घातक रोगों जैसे कैन्सर व एड्स/एच.आई.वी. में न सिर्फ आराम ही पहुँचा सकता है बल्कि उन्हें ठीक भी कर सकता है। अनगिनत मरीज, जिनका चिकित्सकों के पास कोई इलाज नहीं था, और मरने के लिये छोड दिये गये थे, उन्होंने सिद्धयोग को अन्तिम विकल्प के रूप में अपनाया और गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा दीक्षा ली, वह न सिर्फ जीवित और पूर्ण स्वस्थ हैं बल्कि लगभग अपना सामान्य जीवन भी जी रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान जहाँ किसी बीमारी में लाभ पहुँचाने या उसे ठीक करने में असमर्थ रहता है वहाँ योग सफलतापूर्वक उसे ठीक करता है। अतः यह आश्चर्यजनक नहीं है कि अधिकांश मरीज हर प्रकार की चिकित्सा पद्धति अपनाने के बाद भी कोई लाभ न मिलने से एवं जिनके जीवित रहने की आशा समाप्त हो चुकी है, सामान्यतः वह गुरू सियाग के पास मदद के लिये आते हैं।