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विश्व को सच्ची शान्ति और आनन्द भारत से ही मिलेगा।

     

          शान्ति और आनन्द मनुष्य को हृदय से प्राप्त होता है। भौतिक संसाधनों से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। अन्तर और बाह्य में जब तक पूर्ण सामंजस्य पैदा नहीं होगा, संसार के मानव को सच्ची शान्ति और आनन्द मिलना असम्भव है। श्री अरविन्द ने स्पष्ट कहा है कि ''पश्चिम के लोग भौतिक जीवन को उसकी चरम सीमा तक पहुँचा चुके हैं, अब भारत का काम शुरू होता है। उसे इन सब चीजों को अध्यात्म शक्ति के अधीन करके धरती पर स्वर्ग बसाना है। हमारे धर्म गुरु संसार के सामने चाहे कितना ही ढिंढोरा पीटें, परन्तु इस समय भारत के आध्यात्मिक जगत् में जितना अन्धकार है, पहले कभी नहीं था। इस सम्बन्ध में श्रीमा(श्री अरविन्द आश्रम ) ने स्पष्ट कहा है।

      

     "भारत के अन्दर सारे संसार की समस्याएँ केन्द्रित हो गई हैं और उनके हल होने पर सारे संसार का भार हल्का हो जायेगा।" यह एक कटु सत्य है कि इस समय भारत में तमस् संसार भर से अधिक हैं और लोगों को इस बात से भारी दुःख होता होगा, मुझे तो इससे खुशी है। हर वस्तु का एक निश्चित सीमा के लांघते ही रूप परिवर्तित हो जाता है, हमें मालूम है कि जब-जब ही इस भू-खण्ड पर राक्षसों का पूर्ण आधिपत्य हुआ है, ईश्वर ने राम और कृष्ण के रूप में अवतरित होकर, राक्षसों को मार कर, पृथ्वी का भार हल्का किया है। भगवान् श्री कृष्ण ने इस सम्बन्ध में गीता में स्पष्ट कहा है।:-

      

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।4:7॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।

धर्मसंस्थापनार्थाय संभावामि युगे युगे ।। 48॥

      

     श्री अरविन्द की भविष्यवाणी है कि :- 24 नवम्बर 1926 को श्री कृष्ण का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। श्रीकृष्ण अतिमानसिक प्रकाश नहीं हैं। श्री कृष्ण के अवतरण का अर्थ है, अधिमानसिक देव का अवतरण जो जगत् को अतिमानस और आनन्द के लिए तैयार करते हैं। श्रीकृष्ण आनन्दमय हैं। वे अतिमानस को अपने आनन्द की और उद्बुद्ध (Inspire) करके विकास का समर्थन और संचालन करते हैं, पूर्ण सत्य हैं।

      

     अलीपुर जेल में भगवान् ने श्री अरविन्द को स्पष्ट आदेश दिया था “मैं इस देश को अपना संदेश फैलाने के लिए उठा रहा हूँ, यह संदेश उस सनातन धर्म का संदेश है जिसे तुम अभी तक नहीं जानते थे, पर अब जान गये हो। तुम बाहर जाओ तो अपने देशवासियों से कहना कि तुम सनातन धर्म के लिए उठ रहे हो, तुम्हें स्वार्थसिद्धि के लिए नहीं, अपितु संसार के लिए उठाया जा रहा है।

      

     जब कहा जाता है कि भारत वर्ष महान् है तो उसका मतलब है कि सनातन धर्म महान् है। मैंने तुम्हें दिखा दिया कि मैं सब जगह और सब में मौजूद हूँ। जो देश के लिए लड़ रहे हैं, उन्हीं में नहीं, देश के विरोधियों में भी, मैं ही काम कर रहा हूँ। जाने या अनजाने, प्रत्यक्ष रूप से सहायक हो कर या विरोध करते हुए, सब मेरा ही काम कर रहे हैं। मेरी शक्ति काम कर रही है और वह दिन दूर नहीं जब काम में सफलता प्रप्त होगी।'' भगवान् श्री कृष्ण ने गीता में जो व्याख्या की है, श्री अरविन्द को दिये उपर्युक्त आदेश से पूर्ण रूप से मेल खाती है। गीता में भगवान् ने स्पष्ट कहा है :-

      

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।।

भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।।

      

     संसार के सभी धर्मों के संतों ने मुख्य तौर पर एक ही भविष्यवाणी की है कि वह शक्ति भारत के उत्तरी भाग में मानव के रूप में अवतरति होगी। सभी का मत है कि इस सदी के अन्त तक वह अपने क्रमिक विकास के साथ संसार के सामने प्रकट होकर पूरे विश्व को संचालित करने लगेगी। मेरी प्रत्यक्षानुभूति के अनुसार वह पूर्ण सत्ता सन् 1993 तक भारत में अपना पूर्ण प्रकाश फैला देगी।

      

     इसके बाद सदी के अन्त तक संसार की सारी भौतिक सत्ता को अपने अधीन करके उसका संचालन करने लगेगी। इस प्रकार कलियुग का अंत होकर संसार में पूर्ण सात्त्विक शक्तियों का, एक छत्र साम्राज्य स्थापित हो जायेगा। इस तरह जब भौतिक सत्ता का सीधा संचालन आध्यात्मिक सत्ता करने लगेगी तो युग परिवर्तन हो कर पृथ्वी पर स्वर्ग उतर आवेगा।जो कुछ होने वाला है उसका आभास संसार भर के संतों की भविष्यवाणी से स्पष्ट होता है।

- समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग