GSSY - Guru Siyag's Siddha Yoga

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कुछ जरूरी बातें

ठीक होने के पश्चात्, यदि साधक ध्यान व मंत्र जाप बन्द कर देता है तो उसकी बीमारी पुनः प्रकट हो सकती है। भारतीय योग दर्शन कहता है कि ऐसा कोई रोग नहीं है जो ठीक न हो सकता हो। गुरुदेव द्वारा शिष्यों को जो मंत्र दिया जाता है वह संजीवनी मंत्र है जिसका मतलब है कि यदि कोई बिलकुल मौत के किनारे पर पहुँच चुका है और पूर्ण विश्वास के साथ मंत्र जाप एवं ध्यान करता है तो वह रोगमुक्त हो जायेगा। साधक को अपनी दिनचर्या में कोई परिवर्तन किये बिना चौबीसों घन्टे (अधिकतर समय) मंत्र जाप करना चाहिए। साधक को दिन में दो बार कम से कम १० से १५ मिनट के लिये खाली पेट ध्यान भी करना चाहिए।

 

  • साधक जितना ज्यादा मंत्र जाप समर्पण के साथ करेगा उतनी ही तेजी के साथ वह रोग मुक्त होगा।
  • बीमार आदमी को दिन में कम से कम २-३ बार धयान करना चाहिए।
  • ध्यान के दौरान साधक को गुरुदेव से रोगमुक्ति हेतु प्रार्थना करनी चाहिए।
  • साधक को गंडा ताबीज या अन्य कोई ऐसी चीजें जो जादू टोने से सम्बन्ध रखती हों नहीं पहननी चाहिए।
  • जो व्यक्ति गुरुदेव के प्रति दृढ निष्ठा तथा पूर्ण समर्पण रखता है वह कुछ ही दिनों में पूर्ण स्वस्थ हो जाता है।
  • साधक को किसी अन्य गुरू की उपासना पद्धति से बच के रहना चाहिए तथा गुरुदेव के द्वारा दिये गये मंत्र के अलावा किसी अन्य मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।
  • नियमित ध्यान एवं मंत्रजाप, कुण्डलिनी शक्ति को शरीर में ऊपर की ओर उठाता है तथा शरीर बीमारियों से मुक्त होता जाता है।

 

अगर कोई साधक औषधिय ले रहा है तो कुछ दिनों के पश्चात उसे स्वतः ही उनकी आवश्यकता महसूस नहीं होगी और धीरे-धीरे वह छूट जायेंगी।