GSSY - Guru Siyag's Siddha Yoga

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मसीहा की क्या पहचान है

 

मसीहा (अवतार) पूरब से आएगा

बाइबल स्पष्ट रूप से कहती है कि तीसरा एवं अन्तिम मसीहा पूरब दिशा से आयेगा। ओल्ड टेस्टामेन्ट (पुरानी वसीयत) में तीसरे मसीहा एलिय्याह के बारे में कहा है “एक बहुत भूखा पक्षी पूरब से पुकार रहा है, दूर देश से जो व्यक्ति मेरी सलाह को कार्यान्वित करेगा, वह मैंने जो कहा है, मैं उसको पूरा करूँगा, मैंने ऐसा खास उद्देश्य से किया है, और मैं उसे पूरा करूँगा”। (यशायाह ४६:११)
इसी प्रकार यीशु ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सहायक पूरब से आयेगा “क्योंकि जैसे बिजली पूरब से निकलकर पश्चिम तक चमक जाती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा”। (मैथ्यू २४:२७)
सम्बद्धता- गुरू सियाग पूरब के हैं (भारत- राजस्थान) उनका विश्वास है कि जब तक पूरब का आध्यात्म (पुरातन वैदिक ज्ञान) पश्चिम की भौतिकता (पदार्थ)से नहीं मिलता है तब तक पृथ्वी पर स्थायी शान्ति नहीं होगी। इसीलिए गुरू सियाग पश्चिम को सन्देश भेजते रहे हैं कि पूरब तथा पश्चिम को साथ-साथ लाने की आवश्यकता है। यह सन्देश विद्युत गति से आन्तरिक यात्रा करते रहे हैं ठीक वैसे ही जैसे बाइबल में सम्बन्धित पंक्तियों के अनुसार, “क्योंकि जैसे बिजली पूरब से निकलकर पश्चिम तक चमक जाती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा”।

मसीहा विदेशी भाषा बोलेगा

“नियम में यह लिखा है, अन्य भाषा तथा अन्य जबान के व्यक्तियों से क्या मैं नहीं बोलगा? और फिर भी क्या वह उस सबके लिये नहीं सुने जायेंगें, ईश्वर कहता है”। (१ कुरिन्थियों १४:२१)

सम्बद्धता- यहाँ श्लोक में स्पष्ट कहा गया है कि ईश्वर अपने मसीहा के अवतार में अपने शिष्यों के साथ विदेशी भाषा में बात करेगा अर्थात शिष्य भी विदेशी भाषा में ही बात करेंगें, फिर भी विदेश में वे महान आदर के साथ सुने जायेंगे। गुरू सियाग तथा उनके नजदीकी शिष्य हिन्दी बोलते हैं- (भारतीय भाषा)  जो दूसरे देशों में रहते हैं उनके लिये विदेशी भाषा है और वे उनका सन्देश भारत से बाहर फैला रहे हैं।

 

मसीहा लोगों को बपतिस्मा (दीक्षा) देगा

बाइबल के अनुसार पवित्र आत्मा मसीहा लोगों को बपतिस्मा देगा। “और उनसे मिलकर यीशु ने आज्ञा दी कि  यरूशलम को न छोडो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिसकी चर्चा तुम मुझसे सुन चुके हो”। (ऐपोस्टल्स के कार्य १:४)  “क्योंकि जॉहन (युहन्ना)” ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है, परन्तु थोडे दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से (में) बपतिस्मा पाओगे “Not many days hence”। (ऐपोस्टल्स के कार्य १:५)

पवित्रात्मा द्वारा लोगों को बपतिस्मा दिये जाने का एक समान संदर्भ है दैवीय प्रकाशन में (७:२ व ३) जहाँ यीशु कहता है” और मैंने एक स्वर्ग दूत को जीवते परमेश्वर की मोहर लिये हुए पूरब से ऊपर की ओर आते देखा, उसने उन चारों स्वर्गदूतों से, जिन्हें पृथ्वी और समुद्र की हानि करने का अधिकार दिया गया था, ऊँचे शब्दों से पुकार कर कहा। जब तक हम अपने परमेश्वर के दासों के माथे पर मुहर न लगा दें तब तक पृथ्वी, समुद्र और पेडों को हानि न पहुँचाना”।


सम्बद्धता -
बाइबल के इन दोनों ही संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पवित्रात्मा या मसीहा लोगों को बपतिस्मा (दीक्षा) देगा और वह ऐसा ईश्वर के दासों के माथे पर मुहर लगाकर करेगा। केवल एक दिव्य गुरू (पवित्रात्मा) जो सर्वोच्च पद का होगा तथा जो स्वयं ईश्वर को जान चुका होगा लोगों को सही बपतिस्मा दे सकता है ठीक उसी ढंग से जैसे यीशु ने कहा था। गुरू सियाग एक ऐसे ही दिव्य गुरू हैं जो कहते हैं कि ईश्वर का साक्षात्कार मनीषी पुस्तकों के पढने या प्रतिभापूर्ण बहस का मामला नहीं है, यह ईश्वर को अनुभव करने का मामला है- आत्मसाक्षात्कार या ईश्वर का साक्षात्कार। गुरू सियाग अपने शिष्यों से एक दैवीय मंत्र के जाप एवं माथे के मध्य में (भोंहो के मध्य के ठीक ऊपर जिसे अक्सर तीसरी आँख कहा जाता है) ध्यान के द्वारा ईश्वर को अनुभव व साक्षात्कार करने को कहते हैं ठीक वैसे ही जैसा यीशु कहता है, “कहते हुए जब तक हम अपने परमेश्वर के दासों के माथे पर मुहर न लगा दें तब तक पृथ्वी, समुद्र और पेडों को हानि न पहुँचाना”, माथे का मध्य या तीसरी आँख हिन्दू धर्म के अनुसार चेतना का मुख्य केन्द्र है। आध्यात्मिक गुरू के शक्तिपात (दिव्य आन्तरिक ऊर्जा शक्ति को क्रियाशील करके) या बपतिस्मा के द्वारा एक बार यह केन्द्र क्रियाशील होने पर साधक की दृष्टि अन्दर की ओर मुड जाती है और वह ईश्वर का साक्षात्कार करता है।

मसीहा असाध्य रोगों को ठीक करेगा

“और बीमारों को स्वस्थ करना जो उनमें हैं और उन्हें बतलाना कि ईश्वर का राज्य उनके करीब है”।


“लेकिन यदि मैं ईश्वर की उँगली के इशारे से दुष्टात्मा को बाहर करता हूँ, कोई शक नहीं ईश्वर का राज्य आफ पास होगा”। (ल्यूक १०:९  ११:२०)


सम्बद्धता- यह भविष्यावाणी पहले से ही सत्य हो चुकी है क्योंकि गुरू सियाग अनगिनत लोगों को गत २० वर्षों से भी ज्यादा समय से असाध्य तथा लम्बे समय से चले आ रहे रोगों से उन्हें सिद्धयोग की दीक्षा के द्वारा रोग मुक्त कर चुके हैं तथा अभी भी ८३ वर्ष की उम्र में ऐसा कर रहे हैं। जो बीमार हैं तथा मर रहे होते हैं और उनके पास मदद के लिये आते हैं उनसे गुरू सियाग कहते हैं कि अगर दानव आफ अन्दर है तो देवता भी है। अगर एक बार इस ईश्वरीय शक्ति को मैं आफ अन्दर सक्रिय कर देता हूँ तो दानव क्या कर सकता है? दानव को बाहर जाना होगा और आपकी पीडा और बीमारी का अन्त हो जायेगा। आप ईश्वर की कृपा क मार्ग पर हैं। यह बिल्कुल वही है जो बाइबल का मतलब है वह कहती है, “लेकिन यदि मैं ईश्वर की उँगली के इशारे से दुष्टात्मा को बाहर करता हूँ, कोई शक नहीं ईश्वर का राज्य आफ पास होगा”।"

मसीहा अनिश्चित काल का भूत और भविष्य दिखलायेगा

यीशु ने अपने अनुचरों से कहा कि सही मसीहा की पहचान का मुख्य लक्षण यह होगा कि वह अपने अनुयाइयों को बपतिस्मा के बाद उन्हें भूत तथा भविष्य की घटनाओं को दिखाने की योग्यता रखेगा। निम्न पर विचार करें-

“परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आयेगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बतायेगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु ज कुछ सुनेगा, वही कहेगा और आने वाली बातें तुम्हे (दिखायेगा) बतायेगा”।
लेकिन यह वह है जो भविष्यवक्ता योएल द्वारा कही गई है। (एक्ट्स २:१६ से २:३३)

“कि परमेश्वर कहता है कि अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि मैं अपना आत्मा सब मनुष्यों पर उडेलूँगा और तुम्हारे बेटे और तुम्हारी बेटियाँ भविष्यवाणी करेंगी और तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे और तुम्हारे वृद्ध स्वप्न देखेंगे”।

“वरन मैं अपने दासों और दासियों पर भी उन दिनों में अपने आत्मा में से उंडेलूँगा और वे भविष्यवाणी करेंगे”।
“इस प्रकार परमेश्वर के दाहिने हाथ से सर्वोच्च पद पाकर और पिता से वह पवित्र आत्मा प्राप्त करके जिसकी प्रतिज्ञा की गई थी, उसने यह उँडेल दिया है, जो तुम देखते और सुनते हो”।

सम्बद्धता- बहुत से मनुष्य जो गुरू सियाग के सिद्धयोग में शक्तिपात दीक्षा प्राप्त कर चुके हैं ध्यान के दौरान सुदूर पूर्व में घटी घटनाओं एवं भविष्य में घटने वाली घटनाओं को प्रमाणित करते हैं। कुछ ने लिखकर दिया है कि वे अपने पूर्व जन्म देख चुके हैं। गुरू सियाग कहते हैं कि “एक बार जब तुम सिद्धयोग द्वारा आध्यात्म के मार्ग पर पर्याप्त प्रगति कर लेते हो तो तुम में खास शक्तियाँ विकसित हो जायेंगी जो तुम्हें इस योग्य बना देंगी कि तुम सुदूर पूर्व या भविष्य की झलक पा सको, तुम उन घटनाओं को ऐसे देख सकते हो जैसे तुम टेलीविजन के पर्दे पर उन्हें प्रत्यक्ष होते देख रहे हो”।


गुरू सियाग इशारा करते हैं कि पुराने हिन्दू ऋषि पातंजलि, जो ऐसे पहले ऋषि हैं जिन्होंने योग की विशाल पद्धति के नियम बनाये हैं, वह स्पष्ट रूप से अपनी पुस्तक ‘योग सूत्र‘ में कहते हैं कि एक साधक को प्रातिभज्ञान (अन्तर्ज्ञान की योग्यता) विकसित होना सम्भव है जो गहराई के साथ सुदूर पूर्व तथा भविष्य में देख सकने योग्य बनाता है। उसकी दृष्टि से कुछ भी छिपा हुआ नहीं रहता, वह अत्यन्त अस्पष्ट या अज्ञात पदार्थ को भी तत्काल देख सकता है वास्तव में, ऋषि पातंजलि आगे कहते हैं कि एक साधक या योगी जिसने अन्तर्ज्ञान की योग्यता प्राप्त कर ली है अपने पाँचों इन्दि्रय जनित ज्ञान का सम्पूर्ण रूप से विकास अनुभव कर सकता है। यह योगी को ईश्वरीय उच्च इन्दि्रयजनित ज्ञान शब्द, स्पर्श, रूप , रस और गंध का अनुभव कराता है। एक योगी के लिये जो इस अवस्था तक पहुँच चुका है ईश्वर केवल कल्पना की वस्तु नहीं रहता वह अत्यन्त विकसित ज्ञानेन्दि्रयों के ज्ञान के द्वारा दिव्यता (देवत्व) अनुभव कर सकता है, एक ऐसी चीज जिसके बारे में एक साधारण मनुष्य कल्पना भी नहीं कर सकता।    

मसीहा को हानि पहुँचाने का प्रयास होगा

भविष्यवाणियाँ रिवीलेशन १२:१५ व १२:१६ कहती हैं-


“ और सांप ने उस स्त्री के पीछे अपने मूंह से नदी की नाईं पानी बहाया, कि उसे उस नदी से बहा दे। परन्तु पृथ्वी ने उस स्त्री की सहायता की, और अपना मुँह खोलकर उस नदी को जो अजगर ने अपने मुँह से बहाई थी, पी लिया।


यह भविष्यवाणी जिसका यहाँ वर्णन किया गया है वास्तव में गुरुदेव के जीवन में घटित हुई। गुरुदेव ने स्वयं इस घटना का वर्णन किया है। “वर्ष १९३३ में, मानसून के मौसम में, असामान्य रूपसे भारी वर्षा हो रही थी। मैं ९ वर्ष का था तथा राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले के पलाना गाँव में अपनी माँ के साथ रह रहा था। मेरा गाँव कुछ नीचाई में है इस कारण वर्षा का पानी बहकर गाँव में आता है भारी वर्षा के कारण, गाँव पानी से भर गया था। गाँव के मकान अधिकतर कीचड मिट्टी के(कच्चे) बने थे और उनमें से लगभग सभी गिर गये थे। मेरे घर में, एक झोंपडी लकडी की बनी रह गई थी उसी में मेरी माँ ने तथा मैंने शरण ले रखी थी। अचानक, गाँव के दक्षिण-पश्चिम में १०-१५ जगह जमीन में दरारें आ गईं। यह दरारें लगभग १५-२० फुट लम्बी तथा ढाई फुट चौडी थीं। कुछ ही मिनटों में सारा पानी उन दरारों में समा गया। मेरी झोंपडी से लगभग १०-१५ फुट दूर उत्तरी-पश्चिमी दिशा में, एक वैसी ही दरार दिखलाई पडी और जो पानी हमारे चारों ओर था वह उसमें चला गया। अगर वह दरार वहाँ नहीं पडती तो अगले १०-१५ मिनट में मेरी माँ और मैं डूब गये होते।“


इन दरारों के पीछे मुख्य कारण गाँव के पास ही कोयला-खानों का होना था। कोई कार्य बिना कारण के कभी नहीं हो सकता। परन्तु जब यह भविष्यवाणी की गई थी उस समय मेरा गाँव व कोयले की खानें वहाँ नहीं थीं। मेरा गाँव ३९० वर्ष पूर्व बसा था तथा कोयले की खानें लगभग १०० से ११० वर्ष पूर्व खोदी गई थीं।