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अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर

पोस्ट बोक्स नम्बर-41, होटल लेरिया के पास, चौपासनी,
जोधपुर (राजस्थान) भारत - 342 003
फोन:  0291-2753699
मो. : +91-9784742595

ईमेल :avsk@the-comforter.org

कार्यक्रमों की संक्षिप्त जानकारी

प्रतिवर्ष Avsk जोधपुर आश्रम से संबधित कार्यक्रमों का आयोजन

-ः गुरु पूर्णिमा महोत्सवः-

( भारतीय पंचाग वर्ष-‘आषाढ़ मास की पूर्णिमा’, अंग्रेजी महीने ‘जुलाई’ की किसी भी तारीख को यह पर्व तिथि के आधार पर मनाया जाता है।)

      भारतीय हिन्दी मास-‘आषाढ़ पूर्णिमा’ को प्रतिवर्ष यह पावन पर्व श्रद्धा और समर्पण भाव से मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा का दिन, धार्मिक दृष्टि से गुरु-शिष्य के बीच का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी ने अपने शिष्यों को आध्यात्मिक ज्ञान की दीक्षा दी थी। उस दिन के बाद से भारत की पवित्र भूमि पर यह पर्व बड़ी श्रद्धा व समर्पण से मनाया जाता है। व्यासजी के बताये अनुसार गुरु पूर्णिमा का, गुरु भक्तों के लिए विषेष महत्त्व होता है। इस दिन सभी शिष्य सद्गुरुदेव की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। गुरु मिलन का यह दुर्लभ क्षण, ईश्वर कृपा से ही प्राप्त होता है।

      इस अवसर पर देश-विदेश से गुरुदेव के हजारों शिष्य इकत्रित होते हैं व सद्गुरुदेव की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सद्गुरुदेव की दिव्य वाणी में प्रवचन सुनने के बाद 15 मिनट, संजीवनी मंत्र के साथ सामूहिक ध्यान होता है। फिर प्रसाद ग्रहण कर सभी साधक अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं।

    वर्ष 2018 का गुरु पूर्णिमा महोत्सव- शुक्रवार, 27 जुलाई को मुख्य कार्यक्रम जोधपुर आश्रम में आयोजित हुआ। देश-विदेश में सभी जगह, लाखों साधकों ने अपने-अपने स्तर पर मनाया।

-ःअवतरण दिवसः-

(24 नवम्बर, 1926)

      समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग का अवतरण (जन्म) 24 नवम्बर, 1926 को भारत के राजस्थान राज्य के उत्तर की तरफ स्थित बीकानेर जिले के पलाना ग्राम में हुआ। 

सद्गुरुदेव सियाग के अवतरण के संबंध में महर्षि श्री अरविन्द घोष ने 1935 में कहा था-

      ‘‘24 नवम्बर 1926 को श्री कृष्ण का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। श्री कृष्ण अतिमानसिक प्रकाश नहीं है। श्री कृष्ण के अवतरण का अर्थ है अधिमानसिक देव का अवतरण, जो जगत् को अतिमानस और आनन्द के लिए तैयार करता है। श्री कृष्ण आनन्दमय हैं, वे अतिमानस और अपने आनन्द की ओर उद्बुद्ध (Inspire) करके विकास का समर्थन और संचालन करते है।’’

      महर्षि ने इस संदर्भ में कहा था कि मानव रूप में प्रकट हुई वह शक्ति अपने क्रमिक विकास के साथ अतिशीघ्र विश्व के सामने प्रकट हो जाएगी। इस भूमण्डल पर वह शक्ति अपना कार्य शुरू कर चुकी है। 

      जोधपुर आश्रम में प्रतिवर्ष 24 नवम्बर को सुबह से शाम तक सद्गुरुदेव को समर्पित, भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता है। देश-विदेश से हजारों साधक इस दिन कार्यक्रम में भाग लेते हैं तथा लाखों साधक अपनी-अपनी सुविधानुसार अपने-अपने स्तर पर मंत्र जप व ध्यान कर, गुरुदेव की पूजा-अर्चना करते हैं। संस्था की सभी शाखाओं में भी यह कार्यक्रम श्रद्धा और समर्पण भाव से मनाया जाता है।

-ःबरसी पर्वः-

बाबा श्री गंगाईनाथ जी योगी (ब्रह्मलीन)

(यह पर्व तिथि के आधार पर मनाया जाता है। प्रतिवर्ष भारतीय पंचाग वर्ष के पौष मास की बदी (कृष्ण पक्ष )-11 (ग्यारस) (अंग्रजी महीने के अनुसार प्रतिवर्ष दिसम्बर या जनवरी) को मुख्य कार्यक्रम बीकानेर के जामसर नामक स्थान पर मनाया जाता है।)

      जोधपुर आश्रम में भी इस दिन दादा गुरुदेव की पूजा-अर्चना कर सामूहिक ध्यान का कार्यक्रम आयोजित होता है। बाबा श्री गंगाईनाथ जी योगी (ब्रह्मलीन) का बरसी पर्व प्रतिवर्ष पौष की कृष्ण पक्ष की ग्यारस को मनाया जाता है। राजस्थान के बीकानेर जिले से 27 किलोमीटर दूर उत्तर की तरफ जामसर नामक गाँव में भारत भर से हजारों साधक और आसपास के ग्रामीण भक्त लोग शामिल होते हैं।

वर्ष 2018 का बरसी पर्व पौष की कृष्ण पक्ष की 11 ग्यारस, दिनांक 1 जनवरी, 2019 को मनाया जाएगा।

गुरुदेव सियाग का सन्देश

मैं वैदिक सिद्धान्त “वसुदैव कुटुम्बकम” में विश्वास करता हूँ, इसलिये मैं विदेशों के लाखों लोगों, खासतौर से पश्चिम के लोगों तक पहुँचकर उन्हें यह अद्वितीय आध्यात्मिक मदद देने के लिये उत्सुक हूँ। जैसा स्वामी विवेकानन्द ने कहा था पश्चिम के लोग विज्ञान तथा तकनीकी ज्ञान की प्रगति के कारण भौतिक तरक्की कर चुके हैं परन्तु आध्यात्मिक प्रगति के अभाव में अत्यधिक मानसिक वेदना एवं तनाव से घिरे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका जो न सिर्फ पश्चिम का बल्कि समस्त विश्व का अगुआ है, उस तक अपना मिशन ले जाकर, मैं यह कार्य करना चाहता हूँ। अगर अमेरिका में कोई इस दिव्य मिशन के प्रचार प्रसार हेतु सहयोग ( सम्पर्क अथवा धन के रूप में ) करना चाहता है तो वह आगे बढकर ऐसा कर सकता है।