शारीरिक और मानसिक लाभ

  • गुरुदेव सियाग के शक्तिपात दीक्षा से साधक की कुण्डलिनी जाग्रत हो जाती है। यह जाग्रत कुण्डलिनी ध्यान के दौरान विभिन्न यौगिक क्रियाएँ करवाती है जैसे कि – आसान, बंध, मुद्रा, प्राणायाम या फिर हंसना, रोना, शरीर का हिलना डुलना आदि।

  • कुण्डलिनी उन्हीं अंगों का मूवमेन्ट (क्रियाएँ) कराएगी, जो अंग प्रोपरली काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए हरेक साधक को अलग-अलग योग होता है।

    कुण्डलिनी जागरण द्वारा यौगिक क्रियाएओं के अद्भुत लाभ।

  • प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार ही यौगिक क्रियाएँ होतीं हैं इसलिए हर साधक की यौगिक क्रियाएँ दूसरे से भिन्न होतीं हैं।

  • यह यौगिक क्रियाएँ ध्यान के समय मातृ शक्ति कुण्डलिनी अपने अधीन करवाती है। ये क्रियाएँ साधक की अपनी इच्छा अनुसार नहीं होतीं। साधक न तो इन्हें करवा सकता है और न ही इन्हें रोक सकता है।

  • इस साधना का परिणाम साधक की गुरुदेव सियाग के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण पर निर्भर करता है।

  • विद्यार्थियों द्वारा इस साधना के नियमित अभ्यास से एकाग्रता, ग्रहण करने की क्षमता और स्मरण शक्ति में विकास होता है।

आध्यात्मिक लाभ

  • गुरुदेव सियाग सिद्धयोग की नियमित साधना से साधक की वृत्तियों में परिवर्तन आता है। तामसिक वृत्तियों से राजसिक वृत्तियों की तरफ और राजसिक से सात्त्विक की ओर बढ़ते हुए साधक अपने आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होता है।

    गुरुदेव श्री रामलाजी सियाग द्वारा आध्यात्मिक उत्थान एवं कुण्डलिनी जागरण।

  • यह साधना साधक को गृहस्थ जीवन जीते हुए सांसारिक सुख एवं ईश्वर अनुभूति- दोनों की प्राप्ति कराती है।

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