गुरुदेव सियाग का अवतरण दिवस

समर्थ सदगुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग का अवतरण 24 नवम्बर, 1926 को भारत के राजस्थान राज्य के उत्तर की तरफ स्थित बीकानेर जिले के पलाना ग्राम में हुआ।

सदगुरुदेव सियाग के अवतरण के संबंध में महर्षि श्री अरविन्द घोष ने 1935 में कहा था:-

"24 नवम्बर 1926 को श्री कृष्ण का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। श्री कृष्ण अतिमानसिक प्रकाश नहीं है। श्री कृष्ण के अवतरण का अर्थ है अधिमानसिक देव का अवतरण, जो जगत् को अतिमानस और आनन्द के लिए तैयार करता है। श्री कृष्ण आनन्दमय हैं। वे अतिमानस को अपने आनन्द की ओर उद् बु द्ध (Inspire) करके विकास का समर्थन और संचालन करते हैं।"

महर्षि श्री अरविन्द ने इस संदर्भ में कहा था कि मानव रूप में प्रकट हुई वह शक्ति अपने क्रमिक विकास के साथ अतिशीघ्र विश्व के सामने प्रकट हो जाएगी।

इस भूमण्डल पर वह शक्ति अपना कार्य शुरू कर चुकी है।

समर्थ सदगुरुदेव को 1 जनवरी 1969 को गायत्री सिद्धि हुई और 1984 में कृष्ण सिद्धि प्राप्त हुई। ये दोनों सिद्धियाँ एक ही जीवनकाल में आजतक किसी को भी प्राप्त नहीं हुईं हैं। इन दोनों सिद्धियों के होने के कारण से गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान के दौरान स्वतः यौगिक क्रियाएँ होती हैं।
  • स्वामी विवेकानन्द जी का साहित्य पढ़ने के बाद गुरुदेव ने मई 1983 में बाबा श्री गंगाईनाथजी को गुरु स्वीकार किया। अपने गुरुदेव के आदेश से 1990 से गुरुदेव मानव कल्याणार्थ शक्तिपात दीक्षा दे रहे हैं। इस शक्तिपात दीक्षा से गुरुदेव लाखों साधकों की कुण्डलिनी जागृत कर चुके हैं। भारतीय सिद्धयोग दर्शन को विश्व दर्शन बनाने हेतु 10 मई 1993 को अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर की स्थापना की और 25 दिसम्बर 1997 को अपने कर कमलों से वेबसाइट www.the-comforter.org को लाॅन्च किया।

  • जोधपुर आश्रम में प्रतिवर्ष 24 नवम्बर को सुबह से शाम तक सदगुरुदेव को समर्पित, भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता है। देश-विदेश से हजारों साधक इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं तथा लाखों साधक अपनी-अपनी सुविधानुसार अपने-अपने स्तर पर मंत्र जप व ध्यान कर, गुरुदेव की पूजा-अर्चना करते हैं। संस्था की सभी शाखाओं में भी यह दिन श्रद्धा और समर्पण भाव से मनाया जाता है।

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