साधकों के अनुभव

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आध्यात्मिक उन्नति


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धारूहेड़ा (रेवाड़ी) हरियाणा भारत

‘‘जय श्री सत्गुरु महाराज की"

मैंने यू-ट्यूब देखकर गुरुदेव का मंत्र जप और ध्यान शुरू किया था। कुछ दिन किया कुछ अच्छा लगने लगा फिर और जानकारी प्राप्त करने के लिए गुरुदेव के जोधपुर आश्रम पर काॅल करके विस्तृत जानकारी प्राप्त की। वैसे मैं पिछले 10 साल से धार्मिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ हूँ। 2-2 घण्टे बैठकर ध्यान भी लगाया लेकिन कोई प्रत्युतर नहीं था, बस कर लेता था।

जब से गुरुदेव के विषय में जानकारी मिली तब से गहरे ध्यान के लिए मैं प्रयास कर रहा था, कई लोगों के सोशल मीडिया पर अनुभव भी पढे़। उससे मेरी भी लालचा बढ़ी कि काश मुझे भी कुछ दिख जाये लेकिन कुछ समय तक कोई खास अनुभव नहीं हुआ। बस ध्यान के दौरान खींचाव होता था, मन में शांति मिलती थी।
— श्री रामलाल जी यादव
  • जोधपुर आश्रम से मुझे कुछ प्रचार सामग्री भेजी गई। 20 दिसम्बर को मेेरे पास आश्रम से सामग्री पहुँची और उसी रात मुझे स्वप्न में गुरुदेव के दर्शन हुए। बहुत अद्भुत दर्शन हुए। मेरा रोम-रोम हर्षित हो गया। मुझे लगा कि ‘‘प्रचार सामग्री के पार्सल के साथ ही मेरे गुरुदेव मेरे घर आ गए।’’ ये मैं हकीकत कह रहा हूँ। इतने दिन से मैं कर रहा था लेकिन इतना साफ नहीं दिख रहा था,अब आज्ञाचक्र पर खिंचाव होता है। रीढ़ की हड्डी के पीछे झटके लगते हैं, दायां कान ध्यान के दौरान ज्यादा ही फड़फड़ाता है। ये मेरे पहले भी होता था लेकिन अब यह फड़फड़ाहट ज्यादा ही हो गया है।

  • 24 घंटे मेरे अजपा लगा रहता है।

  • पहले मैं दो घंटे से ज्यादा ध्यान करता था लेकिन अब गुरु आज्ञा के अनुसार सिर्फ 15 मिनट ही ध्यान करता हूँ। अब खूब आनंद आता है।

  • अब मेरी इच्छा होती है कि एक बार मैं गुरुदेव के आश्रम पहुँच उनकी चरण धूली को अपने सिर पर धारण करूं। मुझे अंदर से महसूस हो रहा है कि जोधपुर आश्रम में मुझे और ज्यादा ताकत मिलेगी और मैं ध्यान की गहराई में पहुँच पाऊँगा।

  • ‘‘देखो जी हकीकत है जो बताई है मैंने-कल सामग्री पहुँची और आज रात को सपने में गुरुदेव के दिव्य दर्शन हुए। बिलकुल स्पष्ट। इतने दिन तक इतना स्पष्ट दर्शन नहीं हुआ था।’’ इन्होंने बताया कि अब बस सत्य से साक्षात्कार हो गया है, बस समाज सेवा के तौर पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को गुरुदेव के सिद्धयोग दर्शन के बारे में बताना है।


संदर्भ: आध्यात्मिक विज्ञान पत्रिका अप्रैल - मई 2013

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गाँव-बल्लभगढ़ भरतपुर (राज.) भारत

परम पूज्य समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग और बाबा श्री गंगाईनाथ जी महायोगी (ब्रह्मलीन) के पावन चरण कमलों में कोटि-कोटि नमन्।

अचानक मेरा मन योग एवं ध्यान की ओर हुआ और मैं योग गुरु की तलाश में ईश्वर से प्रार्थना करने लगा कि प्रभु मुझे ऐसे योग गुरुदेव का सानिध्य प्राप्त हो कि मेरा जीवन धन्य हो जाये। मैंने योग को सीखने के लिए बहुत प्रयास किया है। श्री योगानंद जी का क्रिया योग सीखने का मानस बना रहा था। समय निकलता गया और एक दिन मैं यूट्यूब पर वीडियो देख रहा था कि अचानक पूज्य गुरुदेव का एक वीडियो जिसमें सिद्धयोग, कुण्डलिनी जागरण और संजीवनी मंत्र के बारे में गुरुदेव बतला रहे थे। मुझे तो मानो ज्ञान का खजाना ही मिल गया ।
— विजय कृष्ण शास्त्री
  • अचानक मेरा मन योग एवं ध्यान की ओर हुआ और मैं योग गुरु की तलाश में ईश्वर से प्रार्थना करने लगा कि प्रभु मुझे ऐसे योग गुरुदेव का सानिध्य प्राप्त हो कि मेरा जीवन धन्य हो जाये। मैंने योग को सीखने के लिए बहुत प्रयास किया है। श्री योगानंद जी का क्रिया योग सीखने का मानस बना रहा था। समय निकलता गया और एक दिन मैं यूट्यूब पर वीडियो देख रहा था कि अचानक पूज्य गुरुदेव का एक वीडियो जिसमें सिद्धयोग, कुण्डलिनी जागरण और संजीवनी मंत्र के बारे में गुरुदेव बतला रहे थे। मुझे तो मानो ज्ञान का खजाना ही मिल गया ।

  • मैंने मंत्र जाप प्रारंभ कर दिया। सिर में भारीपन महसूस हुआ, मैंने जाप बंद कर दिया। एक बार तो पूरा शरीर ही सुन्न पड़ गया था। इस बात से मैं डर गया। कई लोगों ने बताया कि बिना गुरु के ऐसा करने पर शरीर छूट भी सकता है तो मुझे भय बैठ गया। इसके बाद भी मेरे मन में इस योग के प्रति जिज्ञासा बनी रही और मैं लगातार प्रयास करता रहा।

  • उसके बाद जोधपुर आश्रम पर ईमेल के द्वारा मंत्र दीक्षा ली गुरुदेव और दादा गुरुदेव का फोटो भी मुझे प्राप्त हुआ और मैं ध्यान करने लगा। गुरुदेव और दादा गुरुदेव की कृपा से ध्यान में अनेक प्रकार की अनुभूतियाँ होती हैं।

  • पहले गर्दन की विभिन्न प्रकार की क्रियाएँ हुई, इसके बाद प्राणायाम होना प्रारंभ हो गया, कुंभक लगने लगा, कभी आंतरिक कुंभक लगता कभी बाह्य कुंभक लगता हैं। ध्यान में एक दीपक से अनेक दीपक प्रज्वलित होते हुए दिखाई दिए। एक बहुत बड़ा शक्ति पुँज दिखाई दिया जिसमें से दीपक निकल रहे थे और उन दीपकों ने एक वृत्त बना लिया, उसके बाद एक गहरा नीला प्रकाश बहुत गहरा होता चला गया। बंध लगने लगे-मूलाधार बंध, मणिबंध, जालंधर बंध, उड्डियान बंध, जालंधर बंध लगने पर कंठ में वायब्रेशन होने लगा।

  • उसी समय हमने श्री नागर दास जी जो मुम्बई से गुरुभाई हैं, उनके अनुभवों को सुना तो उनसे फोन पर बात की। उन्होंने गुरुदेव और दादा गुरुदेव के बारे में बहुत सारी बातंे बताई। सुबह ध्यान करने के बाद गुरुदेव की कृपा से खुली आँखों से पतंजलि योग के अनुसार बंध, मुद्राएँ, प्राणायाम और अनेक प्रकार की शारीरिक क्रियाएँ होती हैं ।

  • आज खुली आँखों से हाथों से शंख की मुद्र बनी और शंख नाद हुआ उसके बाद हाथों से बांसुरी की मुद्रा बनी और बांसुरी बजने लगी। ऐसा आनंद कि जिसका वर्णन करना बड़ा मुश्किल है। गुरुदेव और दादा गुरुदेव की कृपा से ख़ेचरी मुद्रा भी लगती है। जीवन धन्य हो गया, ना जाने कितने जन्म जन्मान्तर से जिस आनंद की तलाश थी, वह आनंद गुरुदेव और दादा गुरुदेव की कृपा से प्राप्त हो रहा है।

  • सिद्धयोग और संजीवनी मंत्र के द्वारा नेत्रों की ज्योति बढ़ गई और वायु विकार के कारण दांई तरफ चक्कर आते थे सारी समस्याएँ दूर हो गई।

  • गुरुदेव के बताए पथ पर चलने से जीवन की दिशा बदल गई। अब यही प्रार्थना है कि गुरुदेव सत्पथ पर चलाते रहें । जय गुरुदेव


संदर्भ: आध्यात्मिक विज्ञान पत्रिका - दिसंबर 2010

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बैंगलोर (कर्नाटक) भारत

मेरा नाम अनिता बैन पटेल है। मैं मूलतः गुजरात की रहने वाली हूँ, पर वर्तमान में, मैं बैंगलोर में रहती हूँ। पहले से मेरे एक गुरु है-जो उगम योग चलाते थे, से जुड़ी हुई हूँ। वह सौराष्ट्र के थे। अब वह ब्रह्य्रलीन हो चुके हैं। एक दिन मैं मेरे गुरुदेव का ध्यान कर रही थी तो अचानक क्या हुआ कि मेरे आज्ञाचक्र पर गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग का चित्र दिखा। मैं आश्चर्य चकित रह गई। मैंने सोचा कि यह फोटो किसका है? मैंने कभी भी किसी भी माध्यम से ये फोटो देखी नहीं थी। जब मैं लगभग तेरह वर्ष की थी तब मेरे दादाजी ने आध्यात्मिक ज्ञान के बारे में बताना शुरू किया था तो मैंने सोचा कि मेरे दादा जी मुझे दिखे होंगे लेकिन उनका रूप बदला कैसे? मुझे जानने की इच्छा हुई।

  • मेरे मन में एक चिंतन शुरू हो गया कि आखिर ये तस्वीर किसकी थी? मुझे मेरे गुरुदेव के ध्यान में यह तस्वीर क्यों दिखाई दी? मेरे गुरुदेव तो ब्रह्मलीन हो चुके हैं तो अब मेरा समाधान भी करने वाला कोई नहीं था। गुरुवार के दिन क्योकि मैं एक दिन, मैं मेरे गुरुदेव का ध्यान कर रही थी तो अचानक क्या हुआ कि मैं यू-ट्यूब पर सत्संग सुनती रहती हूँ, जैसे ही मैंने यू-ट्यूब खोला तो गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग का वीडियो मेरे सामने आ गया। मैं क्या देखती हूँ कि वही फोटो उस वीडियो में दिखी, जो मैंने उस समय ध्यान करते समय अपने आज्ञाचक्र पर देखी थी। मैं आश्चर्य चकित रह गई।

  • मेरा शरीर पसीना पसीना हो गया। फिर मैंने गुरुदेव के कई वीडियो देखे और ध्यान करने लगी तो मेरे आज्ञाचक्र पर खिंचाव होने लगा। करीब 20-21 दिन से लगातार सुबह शाम संजीवनी मंत्र जप के साथ ध्यान कर रही हूँ। मुझे मेरे गुरुदेव से भी आंतरिक प्रेरणा यही मिली कि अब इन्हीं गुरुजी का ध्यान कर। मुझे तब आश्चर्य हुआ कि मेरा दो दिन बाद ही लम्बे समय से हो रहा असहनीय दर्द गायब हो गया और आज मैं स्वस्थ हूँ।

  • परन्तु मैं गुरुदेव के वीडियो देखती रहती हूँ। कई लोगो के वीडियो देखे जो गुरुदेव के बारे में अलग अलग तरीके से बताते रहते हैं तो आश्रम से जबाब दिया कि हाँ बुहत सारे लोग हैं। जो अपनी तरफ से कुछ न कुछ यू-ट्यूब पर डालते रहते हैं। आप सस्था का आफिसियल यू-ट्यूब चैनल (Gurudev Siyag's Siddha Yoga-Gssy) है, उस पर गुरुदेव के प्रवचन सुन सकती हो।

  • उसने कहा ‘‘मेरी समझ में नहीं आता, जब गुरुदेव की वाणी में प्रवचन है तो फिर ये लोग अपनी- अपनी क्यों सुनाते रहते हैं? गुरुदेव की वाणी में सुनाना चाहिए ना यह कैसे लोग हैं? जो गुरु से ज्यादा अपने आप को महत्त्व देते हैं। और लोगो को भ्रमित करते रहते हैं। ध्यान में समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग की तस्वीर दिखने वाली घटना, और मेरे जीवन में इस आराधना से जो परिवर्तन आया है, इसकी खुशखबरी मैंने मेरे परिवार के आसपास के रिश्तेदारों व हमारी एक 80 लोगों की सत्संग मण्डली है, उन सबको दी और उन लोगों ने भी आश्चर्य व्यक्त किया।

  • जिस महिला ने समर्थ सद्गुरुदेव के विषय में कभी भी सुना या देखा नहीं, और वह अपने गुरुदेव जो सौराष्ट्र के थे, जो अभी भौतिक दुनिया में नहीं है, उनका ध्यान कर रही थी और उनके ध्यान में समर्थ सद्गुरुदेव सियाग की तस्वीर का, टी. वी. स्क्रीन पर जैसे चित्र आते हैं, वैसे आ जाना कितनी बड़ी घटना है। सद्गुरुदेव ने बहुत पहले कहा था कि एक दिन ऐसा आएगा कि लोग शाम को सोकर सुबह उठेंगे तो दुनिया चकाचैंध रह जायेगी कि यह क्या हो गया? और ऐसा होकर रहेगा। यदि वह परमसत्ता एक महिला के ध्यान में अपनी तस्वीर दिखा सकती है तो उसके लिये लाखों करोड़ों लोगों को एक साथ दिखाई दे जाना कोई असंभव नहीं है। पिछले अंक में एक ऐसी ही घटना कनाडा की लिखी गई थी कि उस महिला के मन में अचानक विचार कौंधा कि मुझे नेट पर ‘सिद्धयोग’ की जानकारी लेनी चाहिए और ज्यों हि सर्च किया तो सद्गुरुदेव सियाग का वीडियो सामने आ गया।

संदर्भ: आध्यात्मिक विज्ञान पत्रिका - दिसंबर 2010

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