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गोकलाराम चौधरी

नारकीय जीवन से मुक्ति- नया जीवन मिला

पता

गोकलाराम चौधरी (अध्यापक) पुत्र श्री नारणाराम चौधरी, वाया पोस्ट बायतु चमनजी, तहसील बायतु, जिला बाड़मेर

मैंने गुरुदेव से 1994-95 में सर प्रताप सीनियर सैकण्डरी विद्यालय परिसर, जोधपुर में दीक्षा ली । मुझे मानसिक रोग था, जिसके कारण अत्यधिक सिर दर्द, अज्ञात भय, बेचैनी, घबराहट रहती थी तथा साथ-साथ शारीरिक रूपसे ऐंठन, बदन दर्द, गैस की तकलीफ हर समय बनी रहती थी।

  • मैंने तकलीफ निवारण के लिए तांत्रिकों के चक्कर लगाये लेकिन फायदा नहीं हुआ। तत्पश्चात एक पण्डित जी की सलाह से धार्मिक अनुष्ठान करवाया, लेकिन कष्ट नहीं मिटा। फिर मैंने जोधपुर के मथुरा दास माथुर अस्पताल के डॉ० जी०डी० कूलवाल से साइकेट्री (मानसिक रोग) का इलाज लिया, लेकिन तकलीफ ठीक नहीं हुई। उल्टा टेबलेट्स का आदी हो गया, दवाई नहीं लेता तो इतनी भयंकर पीड़ा होती तथा ऐसा एहसास होता कि मेरा शरीर विस्फोट के साथ बिखर जाएगा।

  • मुझे दूसरा जीवन देने वाले परमदयालु 'मानवता के मसीहा' गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के बताये अनुसार ध्यान, नाम जप व आराधना करने से बिना दवाई के छुटकारा मिला तथा मैं सामान्य व स्वस्थ हो गया। आज मैं स्वस्थ हूँ तथा गुरुदेव द्वारा दिये नये जीवन को आनन्द से जी रहा हूँ।

मुझे मानसिक रोग था, जिसके कारण अत्यधिक सिर दर्द, अज्ञात भय, बेचैनी, घबराहट रहती थी। मुझे दूसरा जीवन देने वाले परमदयालु गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के बताये अनुसार ध्यान, नाम जप करने से बिना दवाई के छुटकारा मिला तथा मैं सामान्य व स्वस्थ हो गया। अब गुरुदेव द्वारा दिये नये जीवन को आनन्द से जी रहा हूँ।
  • मुझे गुरुदेव के ध्यान के दौरान विभिन्न अलौकिक रंग दिखाई देना, भगवावस्त्रधारी साधुओं व उगते सूर्य व पर्वतीय प्रदेश के दर्शन होना, फूल बरसाते देवताओं को देखना ध्यान जनित आनन्द व अलौकिक सुगन्ध व ध्यान व नाम जप से खुमारी रहना तथा ध्यान के दौरान विभिन्न आसन, बन्ध यौगिक क्रियाओं की अनुभूतियां हुई। अतः मेरी गुरुदेव परमदयालु से यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा से मानव मात्र का कल्याण हो।

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