Image इन्द्रा देवी

इन्द्रा देवी

26 साल बाद संतान हुई

पता

इन्द्रा देवी पत्नी श्री नेमाराम विश्नोई (अध्यापक) सोनड़ी, बाड़मेर (राज.)

एक दिन मैं रात्री में सो रही थी। हालांकि मुझे नींद नहीं थी परन्तु आँखें बन्द करके गुरुदेव का संजीवनी मंत्र जाप करते हुए सो रही थी। थोड़ी देर बाद भगवान श्री कृष्ण की बड़ी तस्वीर बिल्कुल आँखों के सामने नजर आयी। उसके थोड़ी देर बाद तस्वीर में से छोटे बालक के रूप में भगवान् श्री कृष्ण हाथ में बांसुरी लिए हुए दर्शन दिए।

  • मैंने हाथ जोड़कर नमस्कार किया तब भगवान् बोले कि बेटा तेरे पिछले जन्म के प्रारब्ध कर्म है, इतना कहकर प्रभु अन्तर्धान हो गए। तत्पश्चात् मैंने देखा कि वास्तव में ही मैंने दोनों हाथ जोड़े हुए है।

  • एक बार मैं गुरुदेव की तस्वीर के सामने खड़ी होकर प्रार्थना करने लगी। जिन्दगी में ज्यादा कष्ट झेलने के पश्चात् गुरुदेव के मिलन तथा समस्याओं के निजात दिलवाने के कारण गुरुदेव की फोटो के सामने मैं रोने लगी। फिर वहीं गुरुदेव की फोटो के सामने से हट गई तथा बंद आँखों से नाम जप कर रही थी इतने में ही मुझे दिखा कि गुरुदेव की फोटो में से भगवान् कृष्ण बाल रूप में नीचे उतर कर मेरे पास आकर खेलने लगे वैसे ही जैसे छोटा बालक अपनी माँ के साथ खेलता हो।

नवम्बर 2013 की बात है कि मैं नागौर स्थित हमारे घर में सो रही थी। रात्री को 12-1 बजे के लगभग स्वप्न में मुझे दिखा कि पूज्य गुरुदेव ने एक खाकी कपड़े में लपेटा हुआ बच्चा लाकर मुझे गोद में दे दिया और मैं काफी देर तक उस बच्चे को देखती रही।
  • जनवरी 2014 की बात है कि मैं शाम का ध्यान कर और गुरुदेव की फोटो के सामने प्रार्थना करके सो गई। मध्यरात्री के पश्चात् स्वप्न में लगा कि मैं ऊपर जा रही हूँ और जाते-जाते महल आया उसके आस-पास हरियाली तथा सुन्दर फूलों वाला एक बगीचा भी था और वहाँ का दृश्य बड़ा ही मनोरम व अलौकिक था। उस महल में सिंहासन पर भगवान् कृष्ण मोर मुकुट पहने हुए बैठे थे और उनका मुख मण्डल अत्यंत तेजस्वी था। पास में राधा जी बैठीं हुईं थीं।

  • जब मैंने उनके श्रीचरणों में जाकर प्रणाम किया तो मेरी आँखें भर आयी। तब मेरी यह दशा प्रभु ने देखी तो मैं देखती हूँ कि भगवान् श्री कृष्ण की आँखों से भी आँसू बह रहे थे और बोले कि बेटा तुमने बहुत कष्ट देखे अब तेरी इच्छा अवश्य पूरी होगी। फिर राधा जी ने मिटटी की बनी हई एक बच्ची दी जिसके सिर पर कानो के पास छोटी-छोटी दो चोटियाँ थी। जब बच्ची मेरे हाथ में दी उस वक्त भगवान श्री कृष्ण बोले कि क्या अब तो खुश है?

  • भगवान् आपने अपनी इच्छा से जो दिया है तो मैं बिल्कुल खुश हूँ। इतना कहकर भगवान् श्री कृष्ण व राधिका जी अन्तर्धान हो गए। इस स्वप्न के ठीक नौ महीने पश्चात् 23 अगस्त 2014 को बच्ची का जन्म हुआ। इस तरह पूज्य गुरुदेव ने 26 वर्ष बाद हमारी झोली भरकर जीवन सुखमय बनाया। मैं पुनः पूज्य गुरुदेव व दादा गुरुदेव के श्री चरणों में अनन्त कोटि प्रणाम करती हूँ।

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