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विरम सिंह राठौड़

पेट दर्द से मुक्ति

पता

विरम सिंह राठौड़ गाँव- वरिया पोस्ट- मेवानगर (नाकोड़ा) बाड़मेर

सर्वप्रथम मैं परम पूज्य गुरुदेव श्री कल्कि अवतार के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ। मेरे जैसे तुच्छ प्राणी को प्रभु ने अपने चरणों में ले लिया, इस कारण बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूँ।

  • मैं पहले पेट की बीमारी से ग्रस्त था। खेलते समय चोट लग जाने के कारण पेट में खतरनाक दर्द होता था। डॉक्टरों को दिखाया तो बताया कि छोटी आँत खाराब हो गई है। अहमदाबाद जाकर ऑपरेशन करवाना पड़ेगा, पास में रुपये नहीं, माता-पिता का देहावसान हो गया था। रुपये कहाँ से लाये जाए? ऑपरेशन कैसे करवाया जाए? बड़ी समस्या थी।

  • मेरे सामने के कमरे में जोगेन्द्र जी शर्मा रहते थे। उन्होंने मुझे बताया कि आप गुरुजी की तस्वीर से ध्यान करो तो आपका रोग ठीक हो सकता है। मुझे इस पर बिल्कुल ही विश्वास नहीं हुआ कि तस्वीर के आगे बैठने से कोई रोग ठीक होता है परन्तु मेरे पास कोई सहारा भी नहीं था। यह सोचकर मैं शाम के समय उनके कमरे में, ध्यान में बैठ गया। उन्होंने बताया आप मन में गुरु-गुरु का नाम जाप करते रहो। मैं ज्योंही ध्यान में बैठा मेरा पहले ही दिन ध्यान लग गया, सिर गोल-गोल घूमने लगा व पेट की कसरत होने लगी, थोड़ा आराम मिला तो मुझे कुछ विश्वास हुआ कि कुछ सच्चाई है।

रात्रि में सोया तो दस मिनट अदृश्य बातचीत हुई, मैं सब सुन रहा था। अन्त में प्रेरणा हुई कि जोधपुर आजा जोधपुर आजा। यह 2001 की बात है। मैं जोधपुर कभी गया भी नहीं था व रुपये भी पास में नहीं थे।
  • सुबह उठकर विद्यालय गया। जहाँ से मुझे 700 रु. मासिक वेतन मिलता था। मैंने उनसे 200 रु. माँगे तो उन्होंने कहा आज तो किसी की फीस आई ही नहीं। मैं निराश होकर विद्यालय से अपने कमरे की ओर रवाना हो गया व विचार करने लगा किसके पास रुपये माँगू व कौन देगा? तभी पीछे से एक लड़का भागता हआ आया कि आपको बड़े सर बुला रहे हैं। मैं वहाँ गया तो उन्होंने मुझे 200 रु. दे दिये।

  • मैं बड़ा खुश हुआ, जल्दी कमरे पर आकर जोगेन्द्र जी से पता लेकर जोधपुर के लिए रवाना हुआ। उन्होंने पूरा पता बताया। पर जब मैं हाउसिंग बोर्ड जोधपुर में चक्कर लगाने लगा तब कोई बताने वाला नहीं था कि यहाँ गुरुजी रहते है। संयोग से मैंने उसी मकान के आगे जाकर पूछा कि यहाँ गुरुजी रहते हैं, तब एक शिष्य बाहर आया उसने कहा गुरुजी यहाँ नहीं मिलेंगे। आप आश्रम जाओ। उन्होंने मुझे आश्रम का पता बताया। मैं आश्रम में गया, जब गुरुजी ने मन्त्र बताया व ध्यान करवाया तब मुझे एक दिव्य आनंद की अनुभूति हुई। उसके बाद मेरा पेट दर्द ठीक हो गया।

  • इससे पूर्व मैं कभी-कभी मांस व शराब भी खा-पी लेता था परन्तु आज तो जिस घर में मांस बनता है, वहाँ खाना भी नहीं खाता हूँ। वृत्तियों में एकदम बदलाव आ गया। पहले मैं 700 रु. कमाता था, आज 12000 रु. कमा लेता हूँ। तामसिक शक्तियाँ जो मुझे बहुत परेशान करती थी, धीरे-धीरे सब शान्त हो गयी। 2004 से मुझे खेचरी मुद्रा भी लगती है। भूख व प्यास भी इतनी नहीं सताती।

  • श्रीगुरुजी की कृपा से जीवन में कई अनुभव हुए। मेरा जीवन नरकमय था, जो आनंदमय बन गया। मैं गुरुजी से प्रार्थना करता हूँ कि मुझे सदबुद्धि देते रहें जिससे मैं इस पुण्य कार्य में सहभागी बन सकूं।

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