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भारत के नाथ सम्प्रदाय के संतों के नाम संदेश।
12 जनवरी 1991
गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग
एवीएसके, जोधपुर के संस्थापक और संरक्षक

भारत में शासक वर्ग ने जब तक संतों के आदेश के अनुसार शासन किया, उस समय देश हर प्रकार से समृद्धशाली रहा। ज्यों-ज्यों सत्ता पक्ष ने संतों के आदेश की अवहेलना करनी प्रारम्भ की, उनकी गिरावट प्रारम्भ हो गई। इसी प्रकार दूसरी ओर संतों का पक्ष भी असन्तुलित होकर नीचे की तरफ गिरने लगा।

  • अब सत्ता पक्ष और संतों का पक्ष, दोनों ही अपनी-अपनी गिरावट की सीमा लाँघ चुके हैं। संसार की इस अन्धकार पूर्ण स्थिति का उपचार गो-रक्ष नाथ के अनुयाइयों के पास ही है। अब उन्हें संगठित होकर संसार के अन्धकार को भगाना ही होगा।

  • यह हमारा इतिहास बताता है कि अवतार मात्र इसी भूमि पर हुए हैं, बाकी सभी जगह पैगम्बर ही हुए हैं। मुसलमान धर्म का मानना है कि मोहम्मद साहब आखिरी पैगम्बर थे। इसके साथ-साथ वे यीशु और मूसा को भी अपना पैगम्बर मानते हैं। इस प्रकार प्रकृति के नियम के अनुसार क्रमिक विकास के अनुसार अब आखिरी पैगम्बर के बाद अवतार का नम्बर है और क्योंकि अवतार केवल भारत की भूमि पर ही हुए हैं ,अतः इस भूमि पर वह सत्ता प्रकट होने वाली है।

  • जब तक भारत के साधु-संत दासवृत्ति त्याग कर नाथवृत्ति धारण नही करेंगे देश का कल्याण असम्भव है। इस देश में हमेशा ऐसा ही होता आया है। अतः मैं मेरे संत सद्गुरुदेव भगवान् श्री गंगाईनाथ जी योगी के आदेश से देश के नाथ सम्प्रदाय के साधु-संतों को संदेश देता हूँ कि अपनी असलियत को पहचानो तुम तो संसार के इन अनाथों के नाथ हो। नाथ ही अनाथों की रक्षा कर सकता है।अतः सम्पूर्ण विश्व का अन्धकर पूर्णरूप से खत्म होने तक आराम से मत बैठो, अब सोचने का समय नहीं है।

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